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उम्मीदोके ख्वाबोके रंगिन गुब्बारे

लोग कहते है जिंदगी ठहरसी गयी है, बारीषकी बुंदे अटकसी गयी है,

परिंदोकी चहक रुकसी गयी है, चारो तरफ चुप्पी फैलसी गयी है…….. .

दिलोमे दरिया मचल तो रहा है, दिमागोमे तूफान थमसा गया है,

हवाओमे सर्दसी बिखरी हुई है, पत्तोकी हलचल अजीब हो रही है………

बातोमे करकश कही भी नही है, बातोमे फिरभी महक क्यो नही है,

दिलोसे नजदीक सभी तो यही है, आपनोकी अपनीही कहानी सही है……….

पहले जो सारे इधर थे उधर थे, फिरभी तो नजदिक लगसे रहे थे,

घरमे है अपने सारे जो फिरभी, पास कोई क्यो न लग रहे है……….

बदला नही है खुदाका इरादा, अंतरमे सारा बदलसा गया है,

अपनेसे अपनी लडाई शुरू है, जिनेकी तमन्ना अभीभी जगी है………

जिंदगी अजीबसी जादू है प्यारे, उम्मीदोके ख्वाबोके रंगिन गुब्बारे,

यहासे वहा तक बिखरे है सारे,  पर रिश्तोके धागोसे बंधे है सारे……………

तुटेगा न कोई न कोई छुटेगा, दिलोंसे बंधा है रिश्ता हमारा,

आपत्ति हो या विपत्तीका घेरा, मिलके सहेंगे, विश्वास हमारा…………….

मुकुंद भालेराव

औरंगाबाद / १९-०७-२०२०

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