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उर्दू जबान है ईश्वर खुदा है

बडी मुद्दतोसे बदली है दुनिया,
मानो की सारी सो जो गयी है |
सिमटी हुईसी मकानोमे बंद है,
कही कुछ नही है, सारा यही है |
न जाना न आना बस घरमे बसेरा,
अपनी तो सारी दुनिया यही है |

ऐसेमे मनमे खयालो की बारीश,
रंगी नजारे बेहद हंसी है |
न जंगल यहा है, न बहती है नदिया,
बरफिली चोटी न सागर किनारा |
फिरभी है जादू मनका यह आंतर,
बनाता रहा है घरमे जो मंदर |

लफजोंकी लहरे मनमे मुकम्मल,
जो चाहे वो लिखदू सारा है अंदर |
आंखे है मनकी उसीकी है जन्नत,
परम कृपालु भगवान अंदर |

उर्दू जबान है ईश्वर खुदा है,
कुछभी कहू मै वही तो है अंदर |
हातोमे फूल है और है सुदर्शन,
आशीष है उसके वरना मै क्या हूं ?

उसकी जूबा है हर लब्ज है उसका,
मेरा करम क्या सभी है उसीका |

मुकुंद भालेराव
औरंगाबाद / ०२-११-२०२०

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